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Devpran
सिंहासन पर विराजमान श्री गणेश मूर्ति – 7-दिवसीय प्राण प्रतिष्ठित
सिंहासन पर विराजमान श्री गणेश मूर्ति – 7-दिवसीय प्राण प्रतिष्ठित
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अपने घर के मंदिर, कार्यालय या बैठक कक्ष में स्थापित करें विघ्नहर्ता, बुद्धि-दाता भगवान श्री गणेश जी का अति भव्य, राजसी एवं पावन सिंहासनारूढ़ स्वरूप। देवप्राण के माध्यम से यह मूर्ति 7 दिनों की संपूर्ण वैदिक चल प्राण प्रतिष्ठा के साथ आपके घर आती है, जिससे आपके जीवन और गृह-मंदिर में विघ्नों का नाश, रिद्धि-सिद्धि का आगमन, सुख, समृद्धि और अलौकिक सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।
मुख्य विशेषताएँ एवं उत्पाद विवरण (Key Features & Product Details)
- देव स्वरूप: भगवान श्री गणेश (सुंदर अलंकृत सिंहासन/सिंहासनारूढ़ मुद्रा में विराजमान, हाथ में मोदक, परशु/अंकुश, आशीर्वाद मुद्रा और मस्तक पर तिलक)
- सामग्री (Material): प्रीमियम मार्बल डस्ट / रेजिन मिश्रण, बारीक हस्तकला नक्काशी और भव्य स्वर्णिम फिनिशिंग के साथ।
- रंग (Color): श्वेत कांति शरीर, पीतांबरी (पीली/नारंगी) धोती, स्वर्णिम मुकुट एवं आभूषण, तथा नीले-हरे रंग के राजसी तकिए व सिंहासन का सुंदर संयोजन।
- उपयोग (Ideal For): घर का मुख्य मंदिर, गणेश चतुर्थी पूजन, गृह प्रवेश, नए व्यवसाय के शुभारंभ (Office/Shop) और शुभ उपहार (Gifting) के लिए अत्यंत उत्तम।
देवप्राण का संकल्प: 7-दिवसीय वैदिक चल प्राण प्रतिष्ठा
आपके घर पहुँचने से पहले, यह पावन मूर्ति हमारे अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा 7 दिनों के शास्त्रोक्त संस्कारों से गुजरती है:
- संकल्प – पवित्र अनुष्ठान एवं देव-आवाहन।
- जलाधिवास – गंगाजल एवं पवित्र नदियों के जल में अधिवास।
- अन्नाधिवास – पवित्र धान्य (अनाज) के मध्य स्थापना।
- पुष्पाधिवास – सुगंधित पुष्पों से आच्छादित करके अधिवास।
- फलाधिवास – ऋतु-फलों के सानिध्य में स्थापना।
- वस्त्राधिवास – रेशमी वस्त्रों से आच्छादित करके आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार।
- नेत्रोन्मीलन एवं प्राण स्थापना – पवित्र नेत्र खोलना एवं वैदिक मंत्रोच्चार द्वारा प्राण प्रतिष्ठा।
पैकेज में क्या-क्या शामिल है (Package Inclusions)
- 1x 7-दिवसीय प्राण प्रतिष्ठित श्री गणेश मूर्ति
- सुरक्षित एवं पवित्र पैकेजिंग – संपूर्ण मर्यादा और सुरक्षा के साथ होम डिलीवरी।
रखरखाव के निर्देश (Care Instructions)
- इस पावन मूर्ति को केवल मुलायम और सूखे सूती/रेशमी कपड़े से साफ करें।
- कठोर रसायन (chemicals), पीतांबरी या सीधे पानी के अत्यधिक इस्तेमाल से बचें ताकि हस्तनिर्मित स्वर्णिम चमक और बारीक रंग हमेशा नए जैसे बने रहें।
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