Divine & Sacred
Bring home authentic idols consecrated through complete 7-day Vedic rituals.
Watch Consecration Videoप्राण प्रतिष्ठित मूर्तियां
Baby Krishna Idol (16 cm) – 7-Day Prana Pratishtha
Makhan Chor Bal Krishna Idol – 7-Day Prana Pratishtha
Lord Shiva Meditating Idol – 7-Day Prana Pratishtha
Ayodhya Shri Ramlalla Idol – 7-Day Prana Pratishtha
अभिमंत्रित मूर्तियां
Sinduri Dhyan Hanuman Ji Statue – 7-Day Prana Pratishtha
Vermilion Five-Faced Hanuman Statue – 7-Day Consecrated
Shwet Kranti Diamond Ornamented Radha Krishna Couple Idol – 7-Day Consecrated
इष्टदेव अनुसार दिव्य मूर्तियां
मार्गदर्शक - पूज्य बाबा कालिदास महाराज जी
शास्त्रोक्त विधि से मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा, वैदिक अनुष्ठानों के सही विधान और आध्यात्मिक सिद्धि के लिए पूज्य बाबा कालिदास महाराज जी का निरंतर पावन मार्गदर्शन प्राप्त होता रहता है।
चल प्राण-प्रतिष्ठा के 7 पवित्र चरण
संकल्प एवं शुद्धि
अनुष्ठान के प्रथम दिन अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा यजमान और देव-विग्रह की पवित्रता हेतु मुख्य संकल्प लिया जाता है। इसके पश्चात मंत्रोच्चारण के साथ गणेश पूजन एवं कलश स्थापना करके अनुष्ठान की पावन शुरुआत की जाती है।
जलाधिवास (Jalaadhivaas)
दूसरे दिन प्रतिमा को पवित्र नदियों के तीर्थ-जल एवं जड़ी-बूटियों से भरे जल में अधिवास कराया जाता है। यह प्रक्रिया मूर्ति के निर्माण काल की समस्त अशुद्धियों और भौतिक ताप को शांत करके उसे परम पावन बनाती है।
अन्नाधिवास (Annadhivaas)
तीसरे दिन देव-प्रतिमा को शुद्ध धान्य (अनाज) में स्थापित किया जाता है। अन्नाधिवास से मूर्ति में अन्नपूर्णा तत्व और पोषण शक्ति का समावेश होता है, जो भक्त के घर में धन-धान्य और समृद्धि का वरदान लाती है।
पुष्पाधिवास (Pushpaadhivaas)
चौथे दिन प्रतिमा को सुगंधित एवं ताजे सुंगंधित पुष्पों की शय्या पर रखा जाता है। पुष्पों की कोमलता और प्राकृतिक सुगंध से मूर्ति में सात्विक सौंदर्य, दिव्य शांति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रसार होता है।
फलाधिवास (Phaladhivaas)
पांचवें दिन विभिन्न प्रकार के रसमय और शुभ फलों में मूर्ति का अधिवास सम्पन्न कराया जाता है। यह संस्कार पूजा के फल की प्राप्ति, जीवन में सफलता और घर-परिवार में मिठास व प्रसन्नता का प्रतीक माना जाता है।
वस्त्राधिवास एवं शय्याधिवास
छठे दिन प्रतिमा को नवीन रेशमी वस्त्रों, आभूषणों और अलंकृत शय्या पर आच्छादित किया जाता है। वैदिक आचार्यों द्वारा विश्राम मंत्रों का पाठ कर प्रतिमा को पूर्ण देव-स्वरूप प्रदान करने की तैयारी की जाती है।
नेत्रोन्मीलन एवं प्राण-स्थापना
अंतिम एवं सबसे महत्वपूर्ण दिन, स्वर्ण शलाका और शहद/घृत से प्रभु के नेत्र खोले जाते हैं (नेत्रोन्मीलन)। तत्पश्चात ऋग्वेद और यजुर्वेद के सिद्ध प्राण-प्रतिष्ठा मंत्रों के उच्चारण से मूर्ति में साक्षात देव-चेतना स्थापित की जाती है। इसके बाद आपकी प्रतिमा आपके घर में पधारने हेतु पूर्णतः तैयार होती है।
चल एवं अचल प्राण-प्रतिष्ठा में अंतर
🚩 चल प्राण-प्रतिष्ठा
गृह-मंदिरों और व्यक्तिगत साधना के लिए उपयुक्त शास्त्रोक्त विधि, जिसमें देव-प्रतिमा में प्राण-शक्ति का संचार किया जाता है।
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गृह-मंदिरों के लिए सर्वोत्तम
यह प्रतिष्ठा विशेष रूप से घर में रखे जाने वाले देव-विग्रहों के लिए की जाती है, जिससे घर का वातावरण निरंतर सात्विक बना रहता है।
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सुगम स्थानान्तरण (Easy Mobility)
इस प्रतिष्ठा के पश्चात आप मूर्ति को एक स्थान से दूसरे स्थान पर (जैसे नया घर, यात्रा या पूजा स्थल) आसानी से ले जा सकते हैं।
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सहज एवं व्यावहारिक सेवा-नियम
इसमें प्रतिदिन के अत्यंत कठोर या बाध्यकारी कर्मकांडों की आवश्यकता नहीं होती। आप अपनी श्रद्धा-अनुसार प्रेम से जल, पुष्प व दीप अर्पण कर सकते हैं।
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दिव्य चैतन्यता एवं सुरक्षा
7 दिनों के वैदिक अनुष्ठान से मूर्ति में देव-तत्व प्रतिष्ठित होता है, जिससे घर में सुख-समृद्धि आती है और किसी दोष का भय नहीं रहता।
🏛️ अचल प्राण-प्रतिष्ठा
सार्वजनिक मंदिरों एवं बड़े देवालयों के लिए की जाने वाली स्थायी विधि, जिसमें देव-विग्रह को एक स्थान पर अचल स्थापित किया जाता है।
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सार्वजनिक मंदिरों के लिए
यह प्रतिष्ठा मुख्य रूप से बड़े मंदिरों और सार्वजनिक तीर्थ स्थलों पर स्थापित की जाने वाली भारी मूर्तियों के लिए की जाती है।
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स्थायी स्थापना (Immovable)
प्रतिष्ठा के बाद मूर्ति को उसके स्थान से हटाया या हिलाया नहीं जा सकता। मूर्ति सदैव एक ही स्थान पर कीलित (अचल) रहती है।
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कठोर नित्य-पूजा का नियम
इसमें प्रतिदिन समय पर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान, षोडशोपचार पूजन, विशिष्ट प्रहर का भोग और आरती का कठोरता से पालन अनिवार्य है।
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विशेष पुजारी व व्यवस्था आवश्यक
नियमों में चूक होने पर दोष माना जाता है, इसलिए इसके लिए समर्पित पुजारियों द्वारा निरंतर सेवा-अर्चना की आवश्यकता होती है।
देवप्राण का संकल्प: हम आपके घर तक अनुभवी आचार्यों द्वारा 7-दिवसीय शास्त्रोक्त चल प्राण-प्रतिष्ठा सम्पन्न मूर्तियां पहुंचाते हैं, ताकि आप बिना किसी कठिन नियम के भय के, अपने घर में साक्षात देव-कृपा का अनुभव कर सकें।
सनातनी मूवमेंट (Sanatani Movement)
🚩 मंदिर पुनर्निर्माण एवं संरक्षण कार्य
जीर्ण-शीर्ण मंदिरों का पुनर्निर्माण
प्राचीन एवं उपेक्षित मंदिरों का जीर्णोद्धार करवाकर उन्हें पुनः दिव्य और जागृत रूप प्रदान करना, ताकि हमारी सांस्कृतिक धरोहर सदैव अक्षुण्ण रहे।
शास्त्रोक्त पूजन व धर्म अनुष्ठान
वैदिक आचार्यों द्वारा विधि-विधान से यज्ञ, महारती और नियमित पूजन सेवा आयोजित करना जिससे धर्म अनुष्ठान की परंपरा निरंतर प्रज्वलित रहे।
मंदिरों का संरक्षण व देव-सेवा
स्थानीय परिसरों में स्थित देवालयों की सुरक्षा, स्वच्छता और सात्विक वातावरण बनाए रखने हेतु निरंतर सेवा कार्य और जागरूकता अभियान चलाना।
🎬 सेवा व अभियान की झलकियां (Reels)
मंदिर जीर्णोद्धार झलक
पुनर्निर्माण एवं सेवा कार्य की विशेष वीडियो झलक।
वैदिक पूजन व आरती
सनातन अनुष्ठान एवं महारती का पावन दृश्य।
सनातन सेवा अभियान
मंदिर संरक्षण एवं समाज सेवा का प्रत्यक्ष रूप।